टॉप 10 संचलन गीत

टॉप 10 संचलन गीत


1. संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो

संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो ।
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो ॥धु॥

युग के साथ मिल के सब कदम बढ़ाना सीख लो 
एकता के स्वर में गीत गुनगुनाना सीख लो
भूल कर भी मुख में जाति-पंथ की न बात हो 
भाषा - प्रांत के लिए कभी ना रक्तपात हो 
फूट का भरा घड़ा है फोड़ कर बढ़े चलो ॥१॥

आ रही है आज चारों ओर से यही पुकार 
हम करेंगे त्याग मातृभूमि के लिए अपार  
कष्ट जो मिलेंगे मुस्कुरा के सब सहेंगे हम 
देश के लिए सदा जिएंगे और मरेंगे हम 
देश का ही भाग्य अपना भाग्य है ये सोच लो ॥२॥


2. हर-हर बम बम हिन्दु बांकुरे हैं हम

हर-हर बम बम हिन्दु बांकुरे हैं
चिर विजय की चाह में बढ़ रहे हैं ये कदम 
देश को उठायेंगे हिन्दु धीर वीर हम ॥

महान हिन्दु धर्म की परम्परा महान है
युगों युगों से देश की दिव्य आन बान है 
युध्द हो कि शान्ति हो कर्म धर्म क्रान्ति हो 
विश्व जानता है ये हम नहीं किसी से कम ॥१॥

काल चक्र वक्र है पूर्णिमा अमा न हो 
दिशा-दिशा प्रहार है खण्ड खण्ड माँ न हो 
अब न दीन हीन हम रह न जाये कोई भ्रम 
काल के प्रवाह को मोड़कर ही लेंगे दम ॥२॥

वंशी की तान है गीत गीता ज्ञान है 
कदम-कदम सधा हुआ तेज है उफान है 
आँख आँख ज्वाल है भुजा-भुजा कृपाण है 
शत्रु देश के सुनो हैं जयी जवान हम ॥३॥


3. जननी जन्मभूमि, स्वर्ग से महान है

जननी जन्मभूमि, स्वर्ग से महान है। 
इसके वास्ते ये तन है, मन है और प्राण हैं ॥

इसके कण-कण में लिखा राम-कृष्ण नाम है
हुतात्माओं के रूधिर से भूमि शस्य- श्याम है
धर्म का ये धाम है, सदा इसे प्रणाम है
स्वतंत्र है धरा यहां, स्वतंत्र आसमान है 
जननी जन्मभूमि, स्वर्ग से महान है ॥1॥

इसकी आन पर कभी जो बात कोई आ पड़े
इसके सामने जो जुल्म के पहाड़ हों खड़े 
शत्रु सब जहान हो, विरुद्ध विधि-विधान हो 
मुकाबला करेंगे जब तक जान में ये जान है
जननी जन्मभूमि, स्वर्ग से महान है ॥2॥

इसकी गोद में हजारों गंगा-यमुना झूमती 
इसके पर्वतों की चोटियां गगन को चूमती  
भूमि ये महान है, निराली इसकी शान है 
इसकी जय-पताका ही स्वयं विजय-निशान है 
जननी जन्मभूमि, स्वर्ग से महान है ॥3॥


4. गलत मत कदम उठाओ सोच कर चलो

गलत मत कदम उठाओ सोच कर चलो, विचार कर चलो।
राह की मुसीबतों को पार कर चलो।। टेक।।

हम पे जिम्मेदारियाँ हैं देश की बड़ी 
हम न बदलें अपनी चाल अब घड़ी घड़ी
हम पे आने वाली आस की नजर पड़ी।
चिराग ले चलो ss आग ले चलो, मस्तियों के रंग भरे फाग ले चलो ॥१॥

मिल के चलो एक साथ अब नहीं रुको
बढ़ते चलो एक साथ अब नहीं थको 
अन्याय का हो सामना न तुम कहीं झुको ।
साज करेगा ss आवाज करेगा, हमारी वीरता पे जहाँ नाज़ करेगा ॥२॥

दूर किनारे रहें मिले ना यह शिखर 
मंजिल के मुसाफिर तुझे क्या राह की फिकर 
चट्टान तू तूफान के झोकों का क्या असर 
अन्धेरा जा रहा दिन है कि आ रहा, वो कौन मंजिलों पे मंजिले बना रहा ॥३॥

काल की करवाल से इन्सान कब डरा
तू प्रलय के बादलों को छोड़ तो जरा
लाख मौत हो मगर मनुष्य कब मरा।
ज्योत तो जला पन्थ जो चला, प्रेम का पला भला वो सूर्य कब ढला ॥४॥


5. हो जाओ तैयार साथियों, हो जाओ तैयार

हो जाओ तैयार साथियों, हो जाओ तैयार ।।

अर्पिता कर दो तन-मन-धन, 
मांग रहा बलिदान वतन 
अगर देश के काम न आए तो जीवन बेकार ।। १ ।।

सोचने का समय गया, 
उठो लिखो इतिहास नया 
बंसी फेंको और उठा लो हाथो में तलवार ।। २ ।।

तूफानी गति रुके नही, 
शीश टके पर झुके नही ' 
ताने हुए माथे के सम्मुख ठहर न पाती हार ।। ३ ।।

काँप उठे धरती अम्बर, 
और उठा लो ऊंचा स्वर 
कोटि कोटि कंठों से गूंजे धरम की जय जयकार ।। ४।।


6. धर्म के लिये जिये समाज के लिये जिये

धर्म के लिये जिये समाज के लिये जिये
ये धडकने ये श्वास हो पुण्यभूमी के लिये कर्मभूमी के लिये ॥धृ॥

गर्व से सभी कहे हिन्दु है हम एक है
जाति पंथ भिन्नता स्नेह सूत्र एक है
शुभ रंग की छटा सप्त रंग है लिये ॥१॥

कोटि कोटि कन्ठ से हिन्दु धर्म गर्जना
नित्य सिद्ध शक्ति से मातृभू की अर्चना 
संघ शक्ति कलियुगे सुधा है धर्म के लिये ॥२॥

व्यक्ति व्यक्ति मे जगे समाज भक्ति भावना 
व्यक्ति को समाज से जोडने की साधना 
दाव पर सभी लगे धर्म कार्य के लिये ॥३॥

एक दिव्य ज्योति से असंख्य दीप जल रहे
कौन लो बुझा सके आंधियो मे जो जले
तेज पुंज हम बढे तमस चिरते हुए ॥४॥


7. देश के बहादुरो जागो जयातुरो

देश के बहादुरो जागो जयातुरो
है समय प्रयाण का हिन्दु देश हिन्दु का
राष्ट्र धर्म के लिये जिये मरे ॥धृ॥

हम जवान देश के लाडले स्वदेश के
गति कभी रुके नही सर कभी झुके नही
पंथ आग से भरा डगमगा रही धरा
वात जोर जोर पे देह सब सखोर दे
पर विराम ले न हम बढे कदम बढे कदम ॥१॥

मत्त हो बढ़े चलो श्रृंग पर चढे चलो
आसमान भेद लो अंग मे लपेट लो
लक्ष अभी दूर है श्रम तनिक जरूर है
हिन्दु बन्धु साथ ले बंग सिंधु पूर्ण ले
विघ्न व्युह तोड़ कर बढ़े चलो बढ़े चलो ॥२॥

तन स्वजाती में पले मन विजाती मे ढले
उस कृतघ्न पाप को गत बीच गाढ लो
जो चरित्रवान है वो सदा महान है।
गाव गाव झूमती विजय पाव चूमती
आ रही निहार लो बहादुरो बहादुरो बहादुरी ॥३॥


8. नवीन पर्व के लिए नवीन प्राण चाहिए

नवीन पर्व के लिए नवीन प्राण चाहिए

स्वतन्त्र देश हो गया प्रभुत्वमय दिशामही 
निशा कराल टल चली स्वतन्त्र माँ विभामयी 
मुक्त मातृभूमि को नवीन मान चाहिए
नवीन पर्व के लिए नवीन प्राण चाहिए ॥१॥

चढ़ रहा निकेत है कि स्वर्ग छू गया सरल 
दिशा-दिशा पुकारती कि साधना करो सफल 
मुक्त गीत हो रहा नवीन राग चाहिए
नवीन पर्व के लिए नवीन प्राण चाहिए ॥२॥

युवकों कमर कसो कि कण्टकों की राह है। 
प्राण-दान का समय उमंग है उछाह है। 
पगों में आँधियाँ भरे प्रयाण - गान चाहिए
नवीन पर्व के लिए नवीन प्राण चाहिए ॥३॥


9. भारत हिन्दुस्थान है हिन्दुओं की शान है

भारत हिन्दुस्थान है 
हिन्दुओं की शान है
भगवन का वरदान है
झंडा हिन्दु राष्ट्र का झंडा भारत वर्ष का ॥१॥

हिन्दु ऐसे वीर है
कई करोड़ो तीर है
लड़ने मे रणवीर है
झंडा हिन्दुराष्ट्र का झंडा भारत वर्ष का ॥२॥

सप्तसिंधू मे स्नान करेंगे
रक्तबिन्दु का दान करेंगे
फिर भी कभी नही झुकने देंगे
झंडा हिन्दुराष्ट्र का झंडा भारत वर्ष का ॥३॥

दुष्मन की पुकार है
कमर में जब तलवार है
रण में लोहा लाल है
झंडा हिन्दुराष्ट्र का झंडा भारत वर्ष का ॥४॥


10. सूत्र संगठन संभाल

सूत्र संगठन संभाल ज्योतियां ये जले 
कोटि कोटि दीप बाल ज्योति ये जले

राष्ट्र अन्धकार के विनाश के लिए 
चिर अतीत के धवल प्रकाश के लिए 
बुद्धि के विवेक के विकास के लिए 
वृद्धि के समृद्धि के प्रयास के लिए
त्याग की लिए मशाल ज्योति ये जले... कोटि कोटि दीप ॥१॥

राष्ट्र की अखंड साधना अमर बने
प्राण प्राण की समर्चना अजर बने
राष्ट्र की नवीन कल्पना संवारने
योजनानुसार पुण्य सर्जना घने
ले विमुक्ति गर्व भाल ज्योति ये जले... कोटि कोटि दीप ॥२॥

कोटि कोटि कंठ की पुकार एक हो 
कोटि कोटि बुद्धि का विचार एक हो 
कोटि कोटि प्राण का श्रृंगार एक हो
एक ध्येय और जीत हार एक हो
राष्ट्र को बना निहाल ज्योति ये जले... कोटि कोटि दीप ॥३॥

एक बार दुग्ध से धरा नहा उठे 
एक बार फिर बहार लाह लहा उठे 
कीर्ति गंध से स्वदेश माह महा उठे
राष्ट्र का विजय निशाँ गह गहा उठे
जग मागा विशाल भाल ज्योति ये जले.. कोटि कोटि दीप ॥४॥


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