बाल संस्कार केन्द्र
उद्देश्य
- बालक और बालिकाओं को परम्परागत पद्धतियों एवं आधुनिक शिक्षण तकनीकों द्वारा भारतीय मूल्यों-मान्यताओं, इतिहास, संस्कृति, दर्शन, विचारधारा के साथ ही साथ महापुरुषों और समाज सुधारको के आदर्श व्यक्तिव से परिचय करा कर संतुलित और यथार्थपरक विचार प्रदान करना।
- उनके चरित्र का इस प्रकार विकास करना ही बड़े होकर वे एक अच्छे नागरिक और सार्थक सामाजिक परिवर्तन के साधक बन सके।
- बालकों के व्यक्तिव का इस प्रकार विकास करना की वे वयस्क हो कर एक जिम्मेदार कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदान नागरिक बन सके।
- बालकों के अंदर अपने राष्ट्र के प्रति देशप्रेम, एकता, अखंडता और गर्व की भावना जागृत करना ।
- बालकों के अंदर आत्मविश्वास एवं स्वाभिमान की भावना को जागृत करना।
- बालकों का आपस में भरोसा और विश्वास को बढ़ावा देना ताकि वे संयुक्त रुप से कार्य करते हुए एक दूसरे की मदद और सेवा कर सके।
- बालकों के मन में अभिभावकों, शिक्षको, विद्वानों, संतो तथा अन्य बड़े लोगो के प्रति सम्धान एवं श्रद्धा की भावना उत्पन्न करना।
- बालकों को समय पालन करने और अपने स्वास्थ्य की निरंतर देखभाल करने की आदत विकसित करना ।
- बालकों को खेल, भजन, गीत, कहानी, महापुरुषों की जीवन गाथाएं, घटनाएँ, पहेलियाँ, लोकोक्तियाँ, मुहावरे, (सुभाषित) प्रश्नोत्तरी और मानचित्र परिचय आदि द्वारा व्यक्तित्व निर्माण करना है।
- बाल साहित्यकार, संगीतकार, चित्रकार, शिल्पकार और नृत्यकार आदि प्रतिभावान लोगों से सम्पर्क करना एवं बालको के व्यक्तित्व निर्माण में समय-समय पर उनसे सहयोग लेना ।
- बच्चों में रचनात्मक प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न गतिविधियों जैसे कविता लेखन, कहानी लेखन, निबन्ध लेखन, चित्रकला और संवाद ( वाद-विवाद ) आदि प्रतियोगिताओ को आयोजित कराना ।
- बालकों को क्षेत्र विचरण (यात्रा) एवं दर्शनीय स्थल देखने के लिए प्रोत्साहित करना।
केन्द्र का स्थान
बाल संस्कार केन्द्र में बालक और बालिकाएँ प्रत्येक सप्ताह एक निश्चित स्थान पर डेढ़ घंटे के लिए एकत्रित होते हैं। उनकी सुविधा के अनुसार किसी खुले स्थान, मन्दिर, पार्क, पुस्तकालय और विद्यालय का चयन कर लिया जाता है। बच्चे उस स्थान पर बड़े-बुजुर्गों के दिशा-निर्देश में एक साथ खेल खेल में भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों को सीखने का प्रयास करते हैं।
गतिविधियाँ
बाल संस्कार केन्द्र में गुरुपूजा, रक्षाबंधन, वृक्षपूजा, जन्माष्टमी, गौपूजा, आदि पर्वों के अतिरिक्त प्रत्येक महीने में आने वाले विशेष पर्वों एवं महापुरुषों के जन्म दिवस मनाये जाते हैं।
सदस्यता
बाल संस्कार केन्द्र के आस-पास बालक और बालिका जिसकी आयु 5 से 16 वर्ष के मध्य हो सदस्य बनने हेतु योग्य होते हैं।
निश्चय ही बाल संस्कार केन्द्र अपने सतत् प्रवाह में राष्ट्र के नौनिहालों के चरित्र निर्माण के लिए समर्पित है। जिसका एक मात्र ध्येय है- आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण करना एवं राष्ट्र के विकास में युवाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करना । यह तभी सम्भव हो सकता हैं जब भारत का प्रत्येक बालक और बालिका भारतीय संस्कृति और मूल्यों से ओत-प्रोत हो । बाल संस्कार केन्द्र इसी संकल्पना के साथ अग्रसर है।
