सुभाषित अभ्यास पद्धति

सुभाषित अभ्यास पद्धति


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में सुभाषित अभ्यास पद्धति का मुख्य उद्देश्य स्वयंसेवकों में अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य, और संस्कृत भाषा के प्रति रुचि जगाना है। इसके तहत शाखाओं या बौद्धिक वर्गों में चुने हुए संस्कृत श्लोकों (सुभाषितों) का सामूहिक पठन, शुद्ध उच्चारण और उनका सरल अर्थ समझाया जाता है।


चयन: जीवन को प्रेरणा देने वाले नीतिपरक, देशभक्ति और परोपकार से जुड़े सुभाषितों को चुना जाता है।
उच्चारण: शब्दों का स्पष्ट और शुद्ध उच्चारण अभ्यास कराया जाता है ताकि मात्राओं और विसर्गों का सही ज्ञान हो।
पदच्छेद व अन्वय: श्लोक को ठीक से समझने के लिए उसके शब्दों को अलग-अलग करना (पदच्छेद) और उसका सीधा अर्थ (अन्वय व अनुवाद) बताया जाता है।
जीवन में प्रयोग: सीखी गई अच्छी बातों को दैनिक जीवन और आचरण में उतारने पर जोर दिया जाता है।


अभ्यास के मुख्य चरण

  • पहले सुभाषित का अर्थ सबसे दोहरवाना। फिर सुभाषित का एक-एक शब्द दोहरवाना, ताकि सुभाषित का अर्थ सबको पता लग जाए, उससे सुभाषित याद करने में सुविधा रहेगी। 
  • उसके बाद प्रत्येक चरण (आधी-आधी पंक्ति) स्वयंसेवकों से दोहरवाकर याद कराना।
  • 1 से 8 तारीख तक सुभाषित याद करके 9 से 15 तारीख तक सब सुभाषित सामूहिक बोलें।
  • सुविधा के लिए गीत, सुभाषित और अमृतवचन की फोटोस्टेट करके वे 15-20 पत्रक मुख्य शिक्षक अपने पास रखे । प्रतिदिन अभ्यास के समय स्वयंसेवकों को देकर विकिर से पहले अगले दिन के लिए उसे पुनः वापिस ले लें। 
  • उससे गीत, सुभाषित व अमृतवचन के शब्द देखकर बोलने में कंठस्थीकरण व उच्चारण-शुद्धि में आसानी रहेगी।

सुभाषितमाला

  • पिछले मासों में जो सुभाषित हो चुके हैं, उनको भी बारी-बारी से एक-एक स्वयंसेवक एक सुभाषित बोले, या सभी स्वयंसेवक सामूहिक बोलें ऐसा प्रयोग भी कभी-कभी करना चाहिए। ताकि शाखा के स्वयंसेवकों की सुभाषितमाला तैयार हो जाए। 
  • शाखा, नगर, खंड स्तर पर सुभाषित प्रतियोगिता हो । 
  • एकात्मता मंत्र शाखा में प्रतिदिन हो।

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