सेवा अमृतवचन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में 'अमृतवचन' राष्ट्रसेवा, अनुशासन, त्याग और समर्पण से प्रेरित महान विचार और अमृत वचन - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अध्ययन का एक अनमोल संग्रह हैं, जो स्वयंसेवकों को देश और समाज के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देते हैं।
1.
आचार्य विनोबा भावे जी ने कहा है कि
दीन-दुखियों के दुःख दूर करने के लिए, तन, मन, धन सब अर्पण कर देने वाले सेवा भावी ही संत हैं।
2.
सेवा करके विज्ञापन न करो, जिसकी सेवा की है, उस पर बोझ मत डालो, नहीं तो तुम्हारी सेवा पुनः स्वीकार करने में उसे संकोच होगा और पिछली सेवा के लिए जो उसने स्वीकार की थी, उसके मन में पछतावा होगा।
- भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार
3.
कुछ ऐसे सेवाव्रती होते हैं, जो दूसरों के सुख-दुःख को अपना समझते हैं। वे स्वामी रामतीर्थ की तरह पूरे भारत से एकात्म हो जाते हैं। में भारत हूँ, मैं चलता हूँ तो भारत चलता है - स्वामी जी की यह उदार सोच परोपकार और समर्पण का श्रेष्ठतम उदाहरण है। उन्होंने अपना विस्तार सम्पूर्ण भारत तक किया था। वे कहते थे कि भारत को स्वतंत्र करने के लिए 'वसुधैव कुटुम्बकम्' भारतीय चिंतन का आधार है।
- कुप्. सी. सुदर्शन
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