डॉ० मोहन राव भागवत
मोहन राव भागवत जो की वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख (RSS Leader) एवं छठे सरसंघचालक (6th RSS Chief) हैं, इनके जीवन की अभी तक की यात्रा का इस छोटे से लेख के माध्यम से वर्णन कर पाना अत्यन्त कठिन कार्य हैं। इस पोस्ट के माध्यम से श्री मोहन भागवत जी की शिक्षा, परिवार, प्रचारक जीवन एवं वर्तमान पर प्रकाश डालने का प्रयास हैं :-
मोहन राव भागवत जी का जन्म सन् 1950 में हुआ था तथा इनकी जन्म दिनांक 11 सितम्बर 1950 हैं। इनका जन्म स्थान चंद्रपुर, महाराष्ट्र हैं। मोहन भागवत जी का पूरा नाम मोहन मधुकर भागवत हैं। अनेक लोग इन्हें मोहन राव भागवत के नाम से जानते हैं। महाराष्ट्र की भाषा मराठी में राव का मतलब जी (उत्तर भारत का आदर सूचक शब्द) होता हैं। वर्तमान में इनके पास संघ के सरसंघचालक का दायित्व होने के कारण स्वयंसेवक इनके नाम से पूर्व ‘परम पूजनीय’ लगाते हैं- परम पूजनीय मोहन राव भागवत।
मोहन भागवत जन्म से स्वयं को सर्वप्रथम हिन्दू ही मानते है जाति को सिर्फ वर्ण व्यवस्था के रूप में मानते हैं। ये जातिगत भेदभाव के प्रबल विरोधी हैं। फिर भी जानकारी हेतु मोहन जी का उपनाम भागवत हैं। भागवत गोत्र महाराष्ट्र की ब्राह्मण जाति का होता हैं। अतः इनकी जाति-वर्ण ब्राह्मण हैं।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का परिवार (Family Information)
मोहन राव जी का परिवार संघ के प्रारम्भ से ही संघ से जुड़ गया था। इनके परिवार की 3 पीढ़ियां संघ से जुड़ी हुई हैं।
- सबसे पहले भागवत जी के बाबा – श्री नानासाहेब संघ के संस्थापक आद्य सरसंघचालक केशव राव बलिराम हेड़गेवार से जुडे़।
- मोहन जी की माता जी – श्रीमती मालती भागवत संघ के महिला संगठन इकाई राष्ट्रीय सेविका समिति की सदस्य रहीं।
- इनके पिता – श्री मधुकर भागवत संघ के स्वयंसेवक थे।
संघ के मुखिया भागवत संघ के प्रचारक है एवं संघ के प्रचारक बिना विवाह किये अपना जीवन संघ को समर्पित करते हैं। अर्थात् ये अविवाहित है इनके कोई पत्नि एवं पुत्री नहीं हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में श्री भागवत ने अपनी प्रारम्भिक एवं स्कूली शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात् पशु चिकित्सा में स्नातक की शिक्षा अध्ययन हेतु नागपुर के वेटेनरी काॅलेज में प्रवेश लिया। वेटेनरी काॅलेज, से नागपुर पशु चिकित्सा में ग्रेजुएशन पूर्ण होने के पश्चात् ही ये संघ के प्रचारक बने – लोग इन्हें डाॅ. मोहन भागवत के नाम से भी जानते व सम्बोधित करते हैं।
मोहन राव का प्रचार जीवन
श्री मोहन भागवत के प्रचारक जीवन व दायित्वों का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार हैंः-
- सन् 1975 में संघ के पूर्ण कालिक प्रचारक बने।
- वर्ष 1977 में अकोला शहर (महाराष्ट्र) मे प्रचारक रहे।
- सन् 1978 में नागपुर और विदर्भ क्षेत्र में संघ के प्रचार के नाते कार्य किया।
- वर्ष 1991 से 1999 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख रहे।
- सन् 2000 में संघ की चुनाव विधि द्वारा सरकार्यवाह (महासचिव) चुने गये।
- वर्ष 2009 में कु.सी.सुदर्शन जी ने अस्वस्थता के कारण दायित्व त्यागा तब उनके स्थान पर मोहन भागवत संघ प्रमुख (सरसंघचालक) के दायित्व पर नियुक्त हुए।
RSS Sarsanghchalak Mohan Bhagwat Security
मोहन जी भागवत को व्यक्तिगत रूप से किसी प्रकार की सुरक्षा की आवश्यकता नहीं हैं, परन्तु विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन के सरसंघचालक (संघ परिवार के मुखिया) होने के नाते सरकार द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से जेड प्लस सुरक्षा (Z+ security) प्रदान की गई हैं। इस सुरक्षा व्यवस्था में हुए व्यय को संभवतः संघ स्वयं ही वहन करता हैं।
RSS Mohan Bhagwat Official Address
परम पूजनीय सरसंघचालक मोहन राव भागवत का केन्द्रीय कार्यालय का पता:- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय, नागपुर, महाराष्ट्र हैं।
Mohan Bhagwat Twitter, Facebook and Other Social Accounts
सादगी पूर्वक जीवन व्यतीत करने वाले मोहन राव भागवत का लेख लिखने तक किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक (Facebook), ट्वीटर (Twitter) आदि (वेबसाईट्स) पर अकाउन्ट नहीं हैं।
इनके द्वारा प्रेषित सूचना संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख के माध्यम से प्रसारित होती हैं। तथा प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से संघ की आॅफिशियल वेब साईट पर अपलोड होती हैं। आज भी डाक के माध्यम से प्राप्त पत्रों का उत्तर स्वयं देने का प्रयास करते हैं।