विभिन्न विषयों पर आरएसएस (संघ) के विचार
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने '100 वर्ष की संघ यात्रा' कार्यक्रम के दौरान कई बड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए थे। उन्होंने हिंदू राष्ट्र, भाजपा के साथ संबंधों, आरक्षण, जातिवाद, आरक्षण और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे विभिन्न मुख्य विषयों पर बात की।
हिंदू राष्ट्र
हिंदू राष्ट्र पर उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र है। इसे किसी सरकारी घोषणा की जरूरत नहीं है क्योंकि ऋषियों ने इसे पहले ही तय कर दिया था। उन्होंने साफ किया कि हम धर्म से चाहे जो भी हों, लेकिन हम भारतीय हैं।
अखंड भारत
अखंड भारत के बारे में उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीति नहीं बल्कि हमारी सभ्यता है। पुराने समय में लोग पूरे भारत में कहीं भी रह सकते थे और काम कर सकते थे।
संघ-भाजपा संबंध
भाजपा के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि संघ पार्टी के फैसले नहीं लेता। पार्टी अध्यक्ष का चुनाव भाजपा खुद करती है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ संघ के कोई मतभेद नहीं हैं।
संघ के विरोध पर
विरोधियों के बारे में उन्होंने जेपी और प्रणव मुखर्जी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि समय के साथ लोगों की सोच बदलती है और गलतफहमियां दूर होती हैं।
जातिवाद पर
जातिवाद पर उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्थाएं समय के साथ खत्म हो जाती हैं। आज जाति व्यवस्था की कोई प्रासंगिकता नहीं बची है। इसे खत्म होना ही होगा, बस यह ध्यान रहे कि समाज पर इसका बुरा असर न पड़े।
काशी-मथुरा आंदोलन
काशी-मथुरा आंदोलन के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ ने केवल राम मंदिर का समर्थन किया है। वह किसी और आंदोलन का हिस्सा नहीं बनेगा। हालांकि, संघ के स्वयंसेवक अपनी इच्छा से इनमें शामिल हो सकते हैं।
इस्लाम और हिंदू दर्शन
इस्लाम और हिंदू दर्शन पर भागवत ने कहा कि धर्म व्यक्ति की अपनी पसंद है। इसमें किसी दबाव या लालच की जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने माना कि हिंदू आत्मविश्वास की कमी से असुरक्षित महसूस करते हैं। आरएसएस किसी भी धर्म के खिलाफ हमले में विश्वास नहीं रखता क्योंकि हम पहले एक राष्ट्र हैं।
मुस्लिमों पर शहर-सड़कों के नाम
शहरों और सड़कों के नामकरण पर उन्होंने सुझाव दिया कि नाम लोगों की भावनाओं से तय हों। मुस्लिम आक्रांताओं के नाम नहीं होने चाहिए, लेकिन देशभक्त मुसलमानों के नाम रखे जा सकते हैं। हमारा समाज एक है और हमें किसी से बैर नहीं है।
आरक्षण पर
आरक्षण पर उनका कहना था कि यह तर्क का नहीं बल्कि संवेदना का विषय है। संघ संविधान के तहत आरक्षण नीतियों का समर्थन करता है और जरूरत रहने तक यह जारी रहना चाहिए।
तीन बच्चे पैदा करने पर
जनसंख्या पर उन्होंने कहा कि सभ्यता बचाने के लिए तीन बच्चे होने चाहिए। संसाधनों का ध्यान रखते हुए इसे तीन तक सीमित रखना ठीक है।
तीन भाषाओं पर
भाषाओं पर उन्होंने कहा कि हर भारतीय को मातृभाषा, राज्य की भाषा और एक संपर्क भाषा आनी चाहिए। अंग्रेजी सीखना बुरा नहीं है, लेकिन हमें अंग्रेज नहीं बनना है। परंपराओं के लिए संस्कृत जरूरी है, पर इसे थोपना गलत है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर उन्होंने कहा कि एआई भाषाएं सीख सकता है और कविता लिख सकता है। लेकिन क्या वह मानवीय भावनाओं को समझ सकता है? संघ इस तकनीक को अपनाने की तैयारी कर रहा है।
घुसपैठियों पर
घुसपैठियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि देश की अपनी सीमाएं होती हैं। बिना अनुमति के देश में घुसना गलत है, चाहे डीएनए एक ही क्यों न हो। सरकार इसे रोकने के प्रयास कर रही है और इसे रुकना चाहिए।
मनुस्मृति पर
मनुस्मृति पर उन्होंने बताया कि 1972 में संघ ने छुआछूत को पूरी तरह नकार दिया था। लोग ग्रंथों के अनुसार नहीं चलते और स्मृतियां समय के साथ बदलती हैं। उन्होंने कहा कि धर्माचार्यों को अब नई स्मृतियां बनानी चाहिए।
75 साल में पद छोड़ने पर
75 साल की उम्र में पद छोड़ने की बात पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा। उन्होंने कहा कि वे तब तक काम करेंगे जब तक संघ चाहेगा।
नेताओं के जेल जाने पर
नेताओं के जेल जाने पर उन्होंने कहा कि नेतृत्व साफ-सुथरा होना चाहिए। हालांकि, इसके लिए कानून बनाना या नहीं, यह संसद तय करेगी।