राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ - प्रचार विभाग
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रचार विभाग संगठन का वह प्रमुख अंग है जो संघ की विचारधारा, नीतियों, सामाजिक कार्यों और संदेशों को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य करता है। यह विभाग मीडिया, प्रकाशन, और जनसंपर्क के माध्यम से समाज में राष्ट्रीय जागरण का कार्य करता है।
भूमिका:
- जनसंपर्क और संवाद: संघ की गतिविधियों, बैठकों और अभियानों की जानकारी समाज और मीडिया तक पहुँचाना।
- साहित्य प्रकाशन: पत्र-पत्रिकाओं, पुस्तकों और वैचारिक साहित्य का प्रकाशन कर विचार प्रसार करना।
- डिजिटल और सोशल मीडिया: आधुनिक संचार माध्यमों (जैसे वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म) के जरिए संघ के विचारों को डिजिटल रूप से प्रस्तुत करना।
- प्रशिक्षण: स्वयंसेवकों को प्रभावी संचार और जनसंपर्क के लिए प्रशिक्षित करना।
उद्देश्य
- जहाँ संघ नहीं पहुँचा वहां संघ के विचारों (राष्ट्रीय विचारों) को पहुँचाना।
- समाज में विरोधियों के द्वारा बनाई गई संघ की छवि तथा वास्तविक छवि में अंतर स्पष्ट करना ।
- प्रचार माध्यम समाज का विवेक जागृत करते हुए राष्ट्रहित के पोषक बने ।
- स्वयंसेवकों में व्यक्ति निर्माण के कार्य के साथ साथ प्रचार माध्यम के कला-कौशल की समझ उत्पन्न करना।
कार्य
- कार्य व विचार का प्रचार हो । कार्यकर्ता आत्म प्रचार से बचें।
- राष्ट्रीय विचारो का प्रचार प्रसार करना।
- प्रचार माध्यमों में कार्य करने वालों को सही जानकारी प्रदान करना ।
- राष्ट्रदेव पत्रिका के पाठको को सुचीबद्ध करके उनका मासिक मिलन करना।
- नगर एवं खंड में न्यूनतम कार्यकर्ताओ की प्रचार टोली ( सोशल मीडिया सहित) का निर्माण करना।
- प्रचार टोली के कार्यकर्ताओ का नियमित प्रशिक्षण एवं बैठक करना ।
- विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के पत्रकारों एवं सम्पादकों की सूची बनाना एवं उनसे नियमित भेंट वार्ता करना।
- स्वयंसेवकों के लिए सोशल मीडिया प्रशिक्षण वर्ग एवं नागरिक पत्रकारिता प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करना ।
- अपने विचार परिवारों में राष्ट्रीय साहित्य एवं पत्र-पत्रिका पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना। जिससे संघ के विचारो के प्रति और अधिक स्पष्टता जागृत हो, क्योंकि विचारो के प्रति स्पष्टता होने से ही प्रतिबद्धता उत्पन्न होती है जिससे समर्पण भाव जागृत होता है।
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