संघ के 6 उत्सवों के लिए आचार पद्धति

संघ के 6 उत्सवों के लिए आचार पद्धति


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में संपूर्ण समाज को संगठित करने के उद्देश्य से 6 प्रमुख उत्सव मनाए जाते हैं। इन उत्सवों के दौरान भगवा ध्वज को सर्वोच्च गुरु और केंद्र मानकर सभी स्वयंसेवक एक निश्चित आचार पद्धति (कार्यक्रम विधि) का पालन करते हैं, जो सामूहिक अनुशासन, आत्मीयता और राष्ट्रप्रेम को दर्शाती है।


(1) वर्ष प्रतिपदा 

यह संघ का प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है। इस दिन स्वयंसेवक भगवा ध्वज के समक्ष एकत्र होकर आद्य सरसंघचालक (डॉ. हेडगेवार) का स्मरण करते हैं। बौद्धिक (विद्वानों का व्याख्यान) होता है और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जन्मदिवस के रूप में इसे मनाया जाता है।

उद्देश्य: भारतीय कालगणना के अनुसार नववर्ष का स्वागत और स्वदेशी मूल्यों का संचार।


वर्षप्रतिपदा 

  1. संपत्
  2. दक्ष
  3. ज्येष्ठ / सर्वोच्च अधिकारी के द्वारा पूजनीय डाक्टरजी के प्रतिमा / चित्र पर माल्यार्पण / पुष्पार्पण ( इसी समय घोष पर केशवः रचना का वादन अपेक्षित है )
  4. आद्य सरसंघचालक प्रणाम 123
  5. घोष पर आद्य सरसंघचालक प्रणाम का वादन
  6. संख्या ( इस समय की संख्या ही कुछ प्रान्तों में उस कार्यक्रम की संख्या मानी जाती है। इस पद्धति को अपने-अपने प्रान्त में मानना नही मानना आपको तय करना है ।)
  7. आरम
  8. दक्ष, ध्वजारोहण, ध्वजप्रणाम
  9. शारीरिक कार्यक्रम (यदि निश्चित किये है तो ही करना)
  10. सांघिक गीत, अमृत वचन, सुभाषित, एकल गीत
  11. बौद्धिक
  12. प्रार्थना, विकर, प्रसाद वितरण

(2) हिन्दु साम्राज्य दिनोत्सव

छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक (ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी) की तिथि पर यह उत्सव मनाया जाता है। शाखाओं में भगवा ध्वज फहराया जाता है, शिवाजी महाराज के जीवन आदर्शों पर चर्चा की जाती है और उनके शौर्य को याद किया जाता है।

उद्देश्य: स्वराज्य, देशभक्ति और राष्ट्रीय स्वाभिमान के भाव को जागृत करना।


हिन्दु साम्राज्य दिनोत्सव

  1. संपत् 
  2. दक्ष
  3. ज्येष्ठ / सर्वोच्च अधिकारी के द्वारा छत्रपती शिवाजी के प्रतिमा / चित्र पर माल्यार्पण / पुष्पार्पण ( इसी समय घोष पर शिवराजः रचना का वादन अपेक्षित है )
  4. आरम
  5. दक्ष, ध्वजारोहण, ध्वजप्रणाम
  6. सांघिक गीत, अमृत वचन, सुभाषित, एकल गीत
  7. बौद्धिक
  8. प्रार्थना, विकर, प्रसाद वितरण

(3) श्रीगुरुपूर्णिमा

संघ में किसी व्यक्ति को गुरु न मानकर भगवा ध्वज को गुरु माना जाता है। सभी स्वयंसेवक भगवा ध्वज को प्रणाम कर दक्षिणा (गुरुदक्षिणा) अर्पित करते हैं। यह त्याग और समर्पण का पर्व है।

उद्देश्य: सनातन धर्म की परंपराओं और त्याग की भावना का सम्मान करना।


श्रीगुरुपूर्णिमा

  1. संपत्
  2. दक्ष, ध्वजारोहण, ध्वजप्रणाम
  3. सर्वोच्च अधिकारी के द्वारा गुरुपूजन तथा समर्पण ( उपिस्थत सभी स्वयंसेवकों का समर्पण भी इस उत्सव में हो सकता है ) 
  4. अमृत वचन, सुभाषित, एकल गीत
  5. बौद्धिक
  6. प्रार्थना, विकर, प्रसाद वितरण
(इसी उत्सव में समर्पण भी करना है और संख्या अधिक है तो एक से अधिक ध्वज रख सकते है अथवा एक ध्वज का चारों दिशा से पूजन - समर्पण भी हो सकता है)

(4) रक्षाबन्धन 

इस दिन सभी स्वयंसेवक शाखा पर एकत्र होकर एक-दूसरे की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधते हैं। इसके बाद स्वयंसेवक समाज के विभिन्न वर्गों, बस्तियों और परिवारों में जाकर लोगों को रक्षा-सूत्र बांधकर आत्मीयता का विस्तार करते हैं।

उद्देश्य: सामाजिक समरसता और बंधुत्व (आपसी भाईचारे) के बंधन को मजबूत करना।


रक्षाबन्धन 

  1. संपत्
  2. दक्ष, ध्वजारोहण, ध्वजप्रणाम
  3. सर्वोच्च अधिकारी के द्वारा ध्वज को प्रणाम कर ध्वजदंड को राखी बांधना
  4. सांघिक गीत, अमृत वचन, सुभाषित, एकल गीत
  5. बौद्धिक
  6. प्रार्थना, विकर,
  7. वामवृत, तत्पश्चात सभी स्वयंसेवक एक दुसरे को राखी बांधेंगे
  8. प्रसाद वितरण, विश्राम

( ध्वजदंड को ही राखी बांधना चाहिए ध्वज के त्रिकोण को बांधने से तह करने के बाद राखी का रंग ध्वज को लगने की संभावना रहती है )


(5) विजयादशमी

संघ की स्थापना विजयादशमी के दिन (27 सितंबर 1925) हुई थी。इस दिन स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश (Uniform) में एकत्र होकर पथ-संचलन (March) करते हैं। शस्त्र पूजन किया जाता है और नागपुर में सरसंघचालक का राष्ट्र के नाम महत्वपूर्ण बौद्धिक होता है।

उद्देश्य: असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की विजय का स्मरण, तथा संगठन की शक्ति का प्रदर्शन।


विजयादशमी

  1. संचलन ( ध्वज के साथ संचलन है तो संपत के पश्चात ध्वजारोहण, प्रार्थना, संख्या, सर्वोच्च अधिकारी को संख्या देकर संचलन प्रस्थान। संचलन समाप्त के पश्चात संख्या, ध्वजप्रणाम, ध्वजावतरण, विकर)
  2. संपत्
  3. दक्ष, सर्वोच्च अधिकारी के द्वारा शस्त्र पूजन कर निर्धारित स्थान पर जाने के पश्चात 
  4. आरम, दक्ष
  5. ध्वजारोहण, प्रार्थना
  6. शारीरिक प्रदर्शन
  7. सांघिक गीत, अमृत वचन, सुभाषित, एकल गीत
  8. बौद्धिक
  9. ध्वजप्रणाम, ध्वजावतरण, विकर्

(6) मकर संक्रति

माघ महीने में सूर्य के उत्तरायण होने पर यह उत्सव मनाया जाता है। इस दिन शाखा में सामान्य से अलग प्रकार की खेल गतिविधियां होती हैं और सभी स्वयंसेवक आपस में तिल-गुड़ बांटते हैं।

उद्देश्य: परस्पर स्नेह, मिठास और आपसी मतभेदों को भुलाकर नई शुरुआत करना।


मकर संक्रति

  1. संपत्
  2. ध्वजारोहण
  3. शारीरिक कार्यक्रम (यदि निश्चित किए है तो )
  4. सांघिक गीत, अमृत वचन, सुभाषित, एकल गीत 
  5. बौद्धिक
  6. प्रार्थना, विकर,
  7. वामवृत तत्पश्चात तिल-गुड़ वितरण 
  8. विश्राम

विशेष सूचनाः- 

  • किसी भी उत्सव में ध्वजारोहण के पूर्व ही प्रतिमा / चित्र पर माल्यार्पण / पुष्पार्पण, शस्त्रपूजन तथा अन्य संवर्धना, विमोचन आदि  कार्यक्रम करना चाहिए । ध्वजारोहण के पश्चात केवल ध्वज को राखी बांधना, शारीरिक बौद्धिक कार्यक्रम हो । ध्वजावतरण, विकर् के पश्चात ही परस्पर राखी बांधना, प्रसाद वितरण होना अपेक्षित है। 
  • विजयादशमी और जिस उत्सव में शारीरिक प्रदर्शन करना है उसे छोडकर सभी उत्सव सामान्य वेष में हो सकते है । 
  • यदि उत्सवों में अध्यक्ष या विशिष्ट अतिथि बुलाये है तो उनके भाषण के पूर्व ही एकल गीत का गायन होना चाहिए। 

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