शाखा में स्वयंसेवकों की भर्ती और विकास
नये-नये बंधुओं को शाखा में लाना संघ के प्रारम्भ से ही स्वयंसवेक की प्रकृति है तथा उनका कर्त्तव्य, धर्म भी। इसके चार पक्ष हैं। - (क) बाल (ख) तरुण (ग) व्यवसायी-कर्मचारी (घ) कारीगर - किसान की भर्ती का महत्व, उपाय- शाखा कार्यक्रम एवं शाखेतर कार्यक्रम ।
(क) बाल स्वयंसवंकों की भरती के उपाय
शाखा कार्यक्रम -
गट व्यवस्था, निरन्तर सम्पर्क, भरती का अभियान चलाकर, कक्षा-प्रमुख, विद्यालय प्रमुख, बालोपयोगी शारीरिक एवं बौद्धिक कार्यक्रम, बाल-कथा, कहानी-श्रृंखला, गीत, बालों की श्रेणी बैठकें, आदर्श दिनचर्या, प्रतियोगिता करना ।
शाखेतर कार्यक्रम -
वन विहार, चन्दन के कार्यक्रम, बाल शिवर, विभिन्न प्रकार की स्पर्धाएं, बालोपयोगी साहित्य, कठिन विषय शिक्षण में सहयोग। उत्तम मुख्य शिक्षक एवं शिक्षक सुलिक्षणी दाइ की घुट्टी काम करता है क्रीडांगन की उचित व्यवस्था करना। बाल शिविर एवं सम्मेलन की व्यवस्था ।
(ख) तरुणों की भरती के उपाय -
शाखा कार्यक्रम -
व्यवस्था, तरुणों की पृथक् शाखा (तरुण प्रभात, तरुण सायं) विद्यालय प्रमुख, कॉलेज प्रमुख, विभिन्न जात-बिरादरियों छात्रावासों का सर्वे करना एवं उनका प्रमुख नियुक्त करना, स्थानीय एवं प्रवासी कार्यकर्ताओं का सम्पर्क । नियुद्ध, दण्ड, दण्ड युद्ध आदि के कार्यक्रम करना। कबड्डी खेल की स्थाई व्यवस्था ।
शाखेतर कार्यक्रम -
चन्दन, सहभोज, नैपुण्य वर्ग, विभिन्न बैठकें, प्रतियोगिताएं (शारीरिक व बौद्धिक), श्रव्यदृश्य एवं साहित्य की व्यवस्था (चाणक्य, सावरकर, विवेकानन्द के नाटक) सांस्कृतिक मानिचत्र, पर्यटन के प्रति रूचि - हल्दीघाटी, चित्तौड़, रणथम्भौर, कुरूक्षेत्र, मानसरोवर सिन्धु दर्शन, विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों के सम्मान समारोह आयोजत करना। योग्य तरूणों की पहचान करना। (पूज्य गुरूजी ने वि. वि. के कार्यक्रमों में तरुणों का आह्वान कर अनेक प्रचारक निकाले) विलक्षण तरुणों से संघ के विकास की विशेष योजना। कन्दराओं में घूमना, तैरने, हजारों दण्ड, बैठकें सूर्यनमस्कार, मीलों दौड़ने जैसे अवसर प्रदान करना। अच्छे खेल के मैदान की व्यवस्था ।
(ग) व्यवसायी, कर्मचारी की भरती के उपाय -
शाखा कार्यक्रम -
व्यवसायी कर्मचारियों की पृथक् प्रभात शाखा / पृथक गण व्यवस्था, खेल सूर्यनमस्कार, आसन सूक्ष्म व्यायाम, प्राणायाम आवर्तन ध्यान, चर्चा, बौद्धिक वर्ग, समाचार समीक्षा, श्रेणी- बैठक, सेवा दिवस की मासिक योजना, मुख्य शिक्षक/कार्यवाह / स्थानीय कार्यकर्ताओं का आदर्श व प्रामिाणक जीवन ।
शाखेतर कार्यक्रम -
चन्दन, सहभोज, वन विहार, संस्कार केन्द्र, कल्याण आश्रम दिखाना, ज्वलन्त समस्याओं पर गोष्ठयाँ एवं परिचर्चा । इस वर्ग से सम्बन्धित विवध क्षेत्र की गितिविधयों का दर्शन एवं सहभागिता का अवसर देना। स्वदेशी के व्यवहार हेतु विभिन्न कार्यक्रम, भजन कीर्तन, रामायण पाठ आदि ।
(घ) कारीगर किसान की भरती के उपाय -
शाखा कार्यक्रम -
पृथक् रात्रि शाखा की व्यवस्था / पृथक् गण व्यवस्था/ भरती का अभियान चलाकर विभिन्न शारीरिक कार्यक्रम खेल, योगासन, सूक्ष्म- व्यायाम, प्राणायाम, सूर्यनमस्कार । चर्चा- कथा, बौद्धिक वर्ग, समाचार समीक्षा, राष्ट्रीय साहित्य उपलब्ध कराना।
शाखेतर कार्यक्रम -
चन्दन, सहभोज, भजन कीर्तन, रामायण पाठ, गोष्ठियाँ बस्ती के मन्दिर एवं तालाब की कारसेवा, वृक्षारोपण, संस्कार केन्द्र चलाना, सामाजिक संगठनों में सहभागिता। आदर्श, गौशाला, कृषि क्षेत्र, खाद उत्पादन केन्द्र आदि के दर्शन का अवसर प्रदान करना । विभिन्न शिवर, सम्मेलन आयोजत करना।