अभ्यास वर्गों के लिए पाठ्यक्रम
दैनंदिन शाखा द्वारा ही हम अपना ध्येय साध्य कर सकेंगे, ऐसा दृढ़ श्रद्धा और वह शाखा मैं दृढ़ता पूर्वक चलाऊँगा, ऐसा निश्चय हर शिक्षक का होना चाहिये। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में कार्यकर्ताओं की कार्यकुशलता, नेतृत्व क्षमता और वैचारिक स्पष्टता विकसित करने के लिए नियमित रूप से 'संघ शिक्षा वर्ग' और 'अभ्यास वर्ग' आयोजित किए जाते हैं। इस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में शारीरिक, बौद्धिक और सांगठनिक विकास को समान महत्व दिया जाता है। निम्न बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सप्ताहों हेतु अभ्यास वर्गों के लिए पाठ्यक्रम।
दण्ड
- दक्ष, आरम, स्वस्थ
- स्कन्ध (भुजदण्ड से), भुजदण्ड (स्कंध से), उपविश (भुजदण्ड में), उत्तिष्ठ (दण्ड के साथ)
- शिरमार सिद्ध भुजदण्ड (शिरमार सिद्ध से)
- शिरमार, अधोमार
- क्रमिका सिद्ध, क्रमिका सिद्ध से भुजदण्ड, क्रमिका सिद्ध से स्वस्थ
- प्रहार सिद्ध प्रहार सिद्ध से भुजदण्ड
- स्थलदण्ड (भुजदण्ड से), भुजदण्ड ( स्थलदण्ड से ) एक पदान्तरेण स्थलदण्ड
- द्विमुखी स्थिर प्रकार 1, 2
- शिरमार प्रक्रम, शिरमार अपक्रम
पदविन्यास
- मोहरे, सिद्ध, सिद्ध से दक्ष
- प्रसर, प्रतिसर
- सम्मुख, विमुख
- मितकाल
- एक पदपुरस्, एक पद प्रतिसर
- तुर्यवृत, अर्धवृत
- ऊनवृत, परिवृत
- प्रणीन - वाम, दक्षिण
- स्थलान्तर - वाम, दक्षिण
दण्डयुद्ध
- दण्डयुद्ध सिद्ध
- शिरोघात
- प्रसर - आघात - प्रतिसर
- शिरोघात रोकने के लिये रोध
- सर्वांगरोध, शिररोध, शिरोघात उड़ाना
- पूर्व अभ्यास
- कुम्भाघात
- प्रसर - आघात - प्रतिसर
- कुम्भाघात के रोध
नियुद्ध
- नियुद्ध सिद्ध
- मुष्ठि प्रहार (एक हस्त)
- मुष्ठि प्रहार ( द्वि हस्त)
- प्रयोग सिद्ध-नियुद्ध सिद्ध से प्रयोग सिद्ध, प्रयोग सिद्ध से नियुद्ध सिद्ध
- रोध - पार्श्वक्षेप, अधोक्षेप, उर्ध्वक्षेप
- अभ्यास
- प्रयोग सिद्ध से मुष्ठि प्रहार प्रक्रम-1
- प्रयोग सिद्ध से मुष्ठि प्रहार प्रक्रम-2
- प्रयोग सिद्ध से मुष्ठि प्रहार प्रक्रम-3
योगासन
- ताड़ासन व सूर्य नमस्कार की स्थिति
- उत्कटासन व सूर्य नमस्कार 1 की स्थिति
- अर्धकटिचक्रासन व सूर्य नमस्कार 2 की स्थिति
- अर्धचक्रासन व सूर्य नमस्कार 3 की स्थिति
- त्रिकोणासन व सूर्य नमस्कार 4 की स्थिति
- वीर भद्रासन प्रकार- 1 व सूर्य नमस्कार 5 की स्थिति
- वीर भद्रासन प्रकार - 2 व सूर्य नमस्कार 6 की स्थिति
- परिवृत त्रिकोणासन व सूर्य नमस्कार 7 की स्थिति
- परिवृत त्रिकोणासन व सूर्य नमस्कार 8, 9, 10 की स्थिति
समता
- दक्ष, आरम, स्वस्थ, एकश: संपत, सम्यक्
- पुरस्सर, प्रतिसर, दक्षिणसर, वामसर (एक/द्वि. / त्रि. / चतुष्पद)
- संख्या, गण विभाग, अंश भाग, गण भाग
- एक तति से द्वितति/त्रितति/चतुष्तति, द्वितति/त्रितति/चतुष्तति से एक तति
- वर्तन (स्थिर स्थिति में) दक्षिणवृत, वामवृत, अर्धवृत, दक्षिणार्ध/ वामार्धवृत
- मितकाल
- संचलन
- मितकाल से स्तभ
- संचलन
शिक्षण विधि
- गण की संरचना, सहजता तथा निर्भयता
- दर्शन कक्षा, गण की लम्बाई
- गण की गहराई
- अंकताल
- प्रयोग का वर्णन
- प्रयोग का विभाजन
- प्रयोग का प्रदर्शन
- प्रयोग की कार्यवाही
- आज्ञायें सूचनात्मक शब्द आदेशात्मक, शब्द सूचना-यति- आज्ञा
तिष्ठ योग
क्रमांक. 1
- दोनों हाथ सामने हथेली आमने-सामने।
- दोनों हाथ ऊपर, सीधे ।
- क्रमांक 1 की स्थिति ।
- योग स्थिति
क्रमांक. 2
- दोनों हाथ बाजू में हथेली नीचे की ओर।
- दोनों हाथों की उँगलियाँ सीने के सामने हथेली नीचे की ओर।
- क्रमांक 1 की स्थिति ।
- योग स्थिति ।
क्रमांक 3
- दोनों हाथ सामने, हथेली आमने-सामने।
- दोनों हाथ कोहनी से वापस मोड़ते हुए पांचों उँगलियाँ मिलाकर कंधों पर स्पर्श करना।
- क्रमांक 1 की स्थिति ।
- योग स्थिति।
क्रमांक. 4
- दोनों हाथ बाजू में हथेली नीचे की ओर ।
- दोनों हाथों से सिर के ऊपर दो बार ताली बजाना ।
- क्रमांक 1 की स्थिति ।
- योग स्थिति ।
व्यायाम योग
योग क्रमांक. 1
- बाया पैर आगे दोनों हाथ आमने-सामने आगे
- दोनों हाथ ऊपर से ओर
- वापस एक वाली स्थिति
- योग स्थिति
योग क्रमांक. 2
- बाएं पैर आगे दोनों हाथ आगे हथेलियां आमने-सामने
- दोनों हाथ खोलते हुए दाएं और बाएं
- एक वाली स्थिति
- योग स्थिति
योग क्रमांक. 3
- दोनों हाथ आगे बाया पैर आगे
- दोनों हाथ कमर से झुक कर बाएं पैर के दाएं बाएं दृष्टि सामने
- एक वाली स्थिति
- योग स्थिति
योग क्रमांक. 4
- बाया पैर बाएं ओर दोनों हाथ ऊपर !
- दोनों हाथ बाई तरफ झुकाना
- एक वाली स्थिति
- योग स्थिति
यही क्रिया दाहिनी तरफ से -
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