संघ परिवार

संघ परिवार


संघ परिवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठनों का समूह है। डॉ. केशव बळीराम हेडगेवार ने 27 सितंबर 1925 को नागपुर में RSS की शुरुआत की थी। यह भारत का एक बड़ा स्वयंसेवी संगठन है। इसने हिंदुत्व की सोच पर आधारित कई अन्य संगठन बनाए। इन सब को मिलाकर संघ परिवार कहा जाता है। ये संगठन समाज के हर हिस्से में काम करते हैं।

इन संगठनों की अपनी अलग पहचान, नियम और कार्यक्रम होते हैं। लेकिन इनकी सोच संघ से ही आती है। ऐसे 40 से ज्यादा पंजीकृत संगठन हैं। मीडिया अक्सर इन्हें संघ परिवार कहता है। इन संगठनों में मुख्य पदों पर संघ द्वारा भेजे गए लोग होते हैं। इन्हें प्रचारक कहा जाता है। प्रचारक अपना पूरा जीवन संगठन को देते हैं। वे पर्दे के पीछे रहकर काम संभालते हैं। संघ की तिमाही और सालाना बैठकों को प्रतिनिधि सभा कहते हैं। यहाँ सभी संगठनों के प्रतिनिधि मिलते हैं और आगे की योजना बनाते हैं।

संघ परिवार के संगठन शिक्षा, राजनीति, धर्म, खेती और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इनका मकसद राष्ट्र निर्माण है। यह लेख इन संगठनों की स्थापना, उनके काम और आपसी रिश्तों की जानकारी देता है। इसमें राजनीति से लेकर छात्र और युवा संगठनों तक का विवरण है।

इस पूरे नेटवर्क की बुनियाद हिंदुत्व है। विनायक दामोदर सावरकर ने 1920 के दशक में इसे परिभाषित किया था। यह विचारधारा भारतीय राष्ट्रवाद को सांस्कृतिक पहचान से जोड़ती है। यह हिंदू समाज को संगठित करने पर जोर देती है। RSS यहाँ किसी मालिक की तरह काम नहीं करता। यह केवल एक मार्गदर्शक है। मोहन भागवत के अनुसार, संघ तभी सलाह देता है जब मांगी जाए। इससे संगठनों को अपने क्षेत्र में आजादी मिलती है।

इस व्यवस्था को चलाने में प्रचारक मुख्य भूमिका निभाते हैं। वे पूर्णकालिक मिशनरी होते हैं जो सिद्धांतों को फैलाते हैं। कई बड़े नेता, जैसे अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी, इसी प्रणाली से निकले हैं। यह तरीका बिना किसी सख्त आदेश के भी सबको एक सोच से जोड़े रखता है। इसी वजह से यह नेटवर्क बदलती परिस्थितियों में खुद को ढाल लेता है।


प्रमुख आनुषंगिक संगठन: एक विस्तृत विश्लेषण

राजनीतिक क्षेत्र

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) BJP

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता में 6 अप्रैल 1980 को नई दिल्ली में भाजपा बनी। इसका जुड़ाव 1951 के भारतीय जनसंघ से है। जनसंघ पहले जनता पार्टी में मिल गया था। बाद में दोहरी सदस्यता विवाद के कारण संघ के सदस्यों ने अलग होकर भाजपा बनाई। पार्टी का लक्ष्य भारत को एक समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र बनाना है। यह शासन में मूल्यों और अंत्योदय यानी गरीबों के उत्थान पर जोर देती है। आरएसएस भाजपा को वैचारिक दिशा दिखाता है। इन दोनों के संबंध समय के साथ बदले और परिपक्व हुए। भाजपा का अलग होना राजनीतिक आजादी की जरूरत को बताता है। यह संघ की ही एक राजनीतिक शाखा है।


श्रम और कृषि क्षेत्र

भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) BMS

भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) दत्तोपन्त ठेंगड़ी ने 23 जुलाई 1955 को भोपाल में इसकी शुरुआत की। यह किसी राजनीतिक दल की इकाई नहीं है। इसका नारा है, "देश के हित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम"। यह संगठन वर्ग संघर्ष के बजाय राष्ट्रहित को पहले रखता है। इसकी स्थापना समाजवाद और मार्क्सवाद के जवाब में एक राष्ट्रवादी विकल्प देने के लिए हुई थी। यह मजदूरों के हक के लिए लड़ता है।


भारतीय किसान संघ (बीकेएस) BKS

भारतीय किसान संघ (बीकेएस) दत्तोपन्त ठेंगड़ी ने ही 4 मार्च 1979 को कोटा में इसकी स्थापना की। इसका मकसद किसानों का पूरा विकास करना है। यह नई तकनीक, पर्यावरण बचाव और पुरानी खेती के तरीकों को बढ़ावा देता है। ठेंगड़ी ने बीएमएस और बीकेएस दोनों बनाए। इससे पता चलता है कि संघ ने अलग-अलग वर्गों तक अपनी विचारधारा पहुँचाने की योजना बनाई थी। यह संगठन किसानों की मदद करता है।


छात्र और युवा क्षेत्र

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी)

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) बलराज मधोक के नेतृत्व में यह संगठन 9 जुलाई 1949 को बना। यह दुनिया का सबसे बड़ा छात्र संगठन होने का दावा करता है। इसका मंत्र "ज्ञान, शील और एकता" है। इसका काम छात्रों में देशभक्ति भरना और उन्हें देश के काम में लगाना है। इसने 1970 के नवनिर्माण आंदोलन जैसे छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया। इसे आजादी के तुरंत बाद बनाया गया ताकि युवाओं को भारतीयकरण की सोच से जोड़ा जा सके।

बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी

बजरंग दल और दुर्गा वाहिनी ये दोनों विश्व हिंदू परिषद की युवा शाखाएं हैं। बजरंग दल पुरुषों के लिए और दुर्गा वाहिनी महिलाओं के लिए है। इन्हें हिंदुत्व के मुद्दों को उठाने के लिए बनाया गया। 1984 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान बजरंग दल बना। यह दिखाता है कि संघ अपने लक्ष्यों के लिए नई संस्थाएं बनाने में लचीला है।


धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र

विश्व हिंदू परिषद (विहिप)

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) माधव सदाशिव गोलवलकर और स्वामी चिन्मयानंद ने 1964 में मुंबई में इसकी स्थापना की। इसका सिद्धांत है, "धर्मो रक्षति रक्षित:"। यह दुनिया भर के हिंदुओं को जोड़ने और धर्म के प्रचार का काम करता है। राम मंदिर आंदोलन और घर वापसी अभियान में इसकी बड़ी भूमिका रही। विहिप के जरिए संघ ने धार्मिक क्षेत्र में औपचारिक काम शुरू किया।

संस्कार भारती

संस्कार भारती यह संगठन जनवरी 1981 में लखनऊ में बना। इसका उद्देश्य कला के जरिए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ाना है। यह प्रदर्शनियों और साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति को सुरक्षित रखता है। इसका ध्येय वाक्य "सा कला या विमुक्तये" है।

राष्ट्रीय सिख संगत और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच

राष्ट्रीय सिख संगत और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ये संगठन अल्पसंख्यकों तक पहुँचने के लिए हैं। सिख संगत गुरबानी फैलाती है और मुस्लिम मंच मुसलमानों में राष्ट्रवाद बढ़ाता है। ये इस बात को गलत साबित करते हैं कि संघ सिर्फ हिंदुओं तक सीमित है। इनके जरिए संघ अन्य धर्मों के बीच संवाद बढ़ाना चाहता है।


सामाजिक सेवा और महिला क्षेत्र

सेवा भारती

सेवा भारती इसकी स्थापना को लेकर अलग-अलग बातें हैं। कुछ इसे 1979 और कुछ 1988 या 1989 का बताते हैं। इसका राष्ट्रीय पंजीकरण 2003 में हुआ। यह बदलाव छोटे स्तर से बड़े ढांचे की ओर बढ़ने को दिखाता है। सेवा भारती पिछड़े लोगों को आत्मनिर्भर बनाती है। यह आश्रय गृह, अस्पताल और सामूहिक विवाह जैसे काम करता है। कोरोना काल में भी इसने बड़ी मदद की।

राष्ट्र सेविका समिति

राष्ट्र सेविका समिति लक्ष्मीबाई केळकर ने 1936 में वर्धा में इसे शुरू किया। इसका मानना है कि स्त्री राष्ट्र की आधारशीला है। यह आरएसएस की महिला शाखा नहीं बल्कि एक स्वतंत्र संगठन है। यह महिलाओं को अपना अलग मंच देता है। इसकी सेविकाएं शारीरिक और बौद्धिक विकास के लिए शाखाएं लगाती हैं।


शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र

विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान

विद्या भारती 1977 में दिल्ली में इसकी स्थापना हुई। यह सरस्वती शिशु मंदिर जैसी स्थानीय कोशिशों से आगे बढ़ा। यह भारत का सबसे बड़ा गैर-सरकारी शिक्षा संगठन है। इसके करीब 30,000 स्कूल हैं। यहाँ संस्कारों और भारतीय संस्कृति पर आधारित शिक्षा दी जाती है।


आर्थिक क्षेत्र

स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) SJM

आर्थिक क्षेत्र स्वदेशी जागरण मंच (SJM) का गठन 22 नवंबर 1991 को नागपुर में हुआ था। इसमें भारतीय मजदूर संघ, एबीवीपी, भारतीय किसान संघ, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत और सहकार भारती के प्रतिनिधि शामिल थे। यह संगठन 1991 की नई आर्थिक नीति के जवाब में बना। इसका मुख्य लक्ष्य भारतीय बाजारों को बचाना और स्वदेशी सामान को बढ़ावा देना है। यह मंच विदेशी उत्पादों का विरोध करता है और स्थानीय सामान के उपयोग पर जोर देता है। एसजेएम दिखाता है कि संघ परिवार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं पर कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देता है। यह पश्चिमी वैश्वीकरण के बजाय एक भारतीय आर्थिक मॉडल का समर्थन करता है।


संघ परिवार का व्यापक प्रभाव और अंतर्संबंध

संघ परिवार के संगठन एक-दूसरे की मदद करते हैं। एबीवीपी छात्रों को जोड़ती है। भारतीय मजदूर संघ और किसान संघ मजदूरों और किसानों को संगठित करते हैं। भाजपा राजनीति संभालती है और सेवा भारती समाज सेवा का काम करती है। इस नेटवर्क में 50 से ज्यादा संगठन हैं। आरएसएस की 73,117 शाखाएं हैं और इसके 40 लाख सदस्य हैं। एबीवीपी में 33 लाख से अधिक और भारतीय मजदूर संघ में लगभग 2 करोड़ सदस्य हैं। विद्या भारती 30,000 स्कूल चलाता है। ये आंकड़े संघ परिवार की बड़ी पहुंच को दिखाते हैं। यह केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक सामाजिक-राजनीतिक ताकत है। इसकी संगठनात्मक क्षमता भारत के अन्य समूहों से अलग और बड़ी है।


निष्कर्ष और दूरगामी परिप्रेक्ष्य

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह नेटवर्क हिंदुत्व के विचार और काम की आजादी पर चलता है। यह संगठन समय के साथ खुद को बदलता रहता है। जब जरूरत पड़ी, तो इसने नए संगठन बनाए। भारतीय जनसंघ से भाजपा का बनना और आर्थिक बदलावों के बाद स्वदेशी जागरण मंच का आना इसके उदाहरण हैं। संघ परिवार का असर सिर्फ राजनीति तक नहीं है। इसने संस्कृति, समाज और शिक्षा के क्षेत्रों में भी अपनी जगह बनाई है।


राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) के प्रमुख अनुषांगिक संगठन

  1. गीता विद्यालय, कुरुक्षेत्र, 1946, माधव सदाशिव गोलवलकर द्वारा स्थापित
  2. सरस्वती शिशु मन्दिर 7.7.1952 गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
  3. शिशु शिक्षा प्रबंध समिति    1958
  4. विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान (30,000 विद्यालय) 1977 दिल्ली, मुरलीधर दत्तात्रेय देवरस द्वारा स्थापित
  5. भारतीय मजदूर संघ 23 जुलाई 1955, भोपाल, दत्तोपंत ठेंगड़ी (1920-2004) द्वारा स्थापित
  6. भारतीय किसान संघ  4.3.1979, कोटा, दत्तोपन्त ठेंगडी द्वारा स्थापित
  7. अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना 24.5.1994 दिल्ली, मोरोपंत पिंगले (1919-2003) द्वारा स्थापित
  8. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् 09.7.1949 बलराज मधोक द्वारा स्थापित
  9. अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद 7.11.1992 दिल्ली
  10. अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत1974, पुणे में बिन्दुमाधव जोशी द्वारा स्थापित
  11. संस्कार भारती January, 1981 Lucknow
  12. सेवा भारती 1979
  13. राष्ट्रीय सेवा भारती
  14. भारतीय जनसंघ 21.10.1951 डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित
  15. भारतीय जनता पार्टी  06.4.1980, दिल्ली, अटल बिहारी वाजपेयी
  16. लघु उद्योग भारती
  17. क्रीड़ा भारती 1992
  18. आरोग्य भारती
  19. नेशनल मेडिकोज एसोसिएशन
  20. संस्कृत भारती 1996
  21. प्रज्ञा भारती 1990
  22. विज्ञान भारती 1992 जबलपुर
  23. बाबा साहिब आपटे स्मारक समिति, 1973, नागपुर, मोरोपन्त पिंगले द्वारा स्थापित
  24. भारत विकास परिषद् 12.1.1963, डॉ सूरज प्रकाश द्वारा स्थापित
  25. विश्व हिंदू परिषद्  1964, मुम्बई, माधव गोलवालकर एवं स्वामी चिन्मयानन्द आदि द्वारा
  26. राष्ट्र सेविका समिति 25.10.1936, नागपुर, लक्ष्मीबाई केलकर द्वारा स्थापित
  27. राष्ट्रीय सम्पादक परिषद
  28. भारत प्रकाशन 1947
  29. पाञ्चजन्य हिन्दी साप्ताहिक 14.1.1948
  30. आर्गनाइजर अंग्रेजी साप्ताहिक 1947
  31. राष्ट्रधर्म हिन्दी मासिक 1947
  32. स्वदेश हिन्दी दैनिक (अक्षय तृतीया, 1970 ई), ग्वालियर
  33. दीनदयाल शोध संस्थान 1972, दिल्ली, नानाजी देशमुख (1916-2010) द्वारा स्थापित
  34. हिंदू स्वयंसेवक संघ
  35. अखिल भारतीय शिक्षण मण्डल
  36. वनवासी कल्याण आश्रम 26.12.1952, जशपुर, रमाकान्त केशव देशपांडे द्वारा स्थापित
  37. स्वदेशी जागरण मंच 22.12.1991, दत्तोपन्त ठेंगड़ी द्वारा स्थापित
  38. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच
  39. भारतीय विचार केन्द्र 1982 पी परमेश्वरन द्वारा स्थापित
  40. राष्ट्रीय सिख संगत 24.11.1986
  41. विवेकानन्द केन्द्र 1972 एकनाथ रानडे (1914-1982) द्वारा स्थापित
  42. अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद,  उत्तर प्रदेश, 1992
  43. अखिल भारतीय राष्त्रीय शैक्षिक महासंघ 1993
  44. वित्त सलाहकार परिषद्
  45. सहकार भारती, गणेश चतुर्थी, 1978 ई, पुणे
  46. सामाजिक समरसता मंच 14.4.1983 दत्तोपन्त ठेंगडी द्वारा स्थापित
  47. हिन्दू जागरण मंच 1990
  48. विश्व संवाद केन्द्र
  49. अखिल भारतीय साहित्य परिषद् 27.10.1966 नई दिल्ली
  50. दधीचि देहदान समिति

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सम्बद्ध समस्त स्वयंसेवक, संगठन, आनुषंगिक संस्थान, शिक्षण संस्थान, पत्र-पत्रिकाएँ व प्रतिष्ठान- सभी संघ परिवार की श्रेणी में आते हैं। इन सभी संगठनों का उद्देश्य संघ की विचारधारा का प्रसार करना और राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य की ओर मिलकर काम करना है। 


document.write(base64decode('encoded string containing entire HTML document'));
और नया पुराने

Ads

Ads

نموذج الاتصال