आद्य सरसंघचालक प0 पू0 डॉ0 केशवराव बलिराम हेडगेवार जी की टाइम लाइन (TIME LINE)
१ अप्रैल १८८९ ई०
नागपुर में जन्म (कुल का मूल स्थान आन्ध्र के तेलंगाना भाग में कुन्दकुर्ती ग्राम)। श्री केशवराव बलिराम हेडगेवार पूरा नाम। श्रद्धेय बलिराम पन्त हेडगेवार पूज्य पिताजी। श्रद्धेया श्रीमती रेवतीबाई (श्रीमती यमुनाबाई) पूज्या माता जी। ३ भाई एवं ३ बहिनों में सबसे छोटे। ६-७ वर्ष की आयु में प्राथमिक शिक्षा के बीच चेचक के प्रकोप से पीड़ित। प्राथमिक शिक्षा के बाद अध्ययन हेतु नागपुर के ही नीलसिटी हाई स्कूल में प्रवेश।
२२ जून १८९७ ई०
मात्र ८ वर्ष की आयु में देशभक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण - इंग्लैण्ड की महारानी विक्टोरिया के राज्यारोहण के ६० वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मिली मिठाई को कूड़ेदान में फेंकना।
१९०१ ई०
१२ वर्ष की आयु, इंग्लैण्ड के ही राजा एडवर्ड सप्तम के राज्यारोहण के अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करने हेतु राजनिष्ठ लोगों और एम्प्रैस मिल के मालिकों द्वारा छोड़ी गयी आतिशबाजी का बहिष्कार। नागपुर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज के (सीतावर्डी) किले के ऊपर "अंग्रेजों" का झण्डा (यूनियन जैक) उतार कर भगवा ध्वज फहराने हेतु पहुँचने के लिए मित्रों के साथ अपने गुरुजी श्री बझे जी के कमरे में सुरंग खोदना। अंग्रेजों से देश को स्वतन्त्र कराने हेतु चल रहे सभी प्रकार के संगठनों, आन्दोलनों अथवा कार्यक्रमों में किसी न किसी रूप में सहभाग।
१९०७/०८ ई०
विजयादशमी के दिन निकले जुलूस में "वन्देमातरम" का उद्धघोष, "रावण मारने का वास्तविक अर्थ क्या है?" विषय पर पहला भाषण, सरकार द्वारा राजद्रोह का मुकदमा चलाने का असफल प्रयास।
१९०८ ई०
१९ वर्ष की आयु में रिस्ले परिपत्र (रिस्ले सर्कुलर) के विरोध में विद्यालय निरीक्षकों का वन्दे मारतम् के उद्धोष से स्वागत, विद्यालय से निष्कासन, क्षमा याचना नहीं।3
१९१० ई०
कोलकाता के नेशनल मेडिकल कॉलेज में अध्ययन हेतु प्रवेश। कोलकाता के दंगों में घायलों की सेवा हेतु महाविद्यालयी विद्यार्थियों के साथ "सुश्रूषा-पथक" बनाकर घायलों की सेवा। कोलकाता के प्रसिद्ध क्रान्तिकारी संगठन "अनुशीलन समिति" की अन्तरंग सदस्यता प्राप्त, अन्तरंग प्रतिज्ञा द्वारा प्रतिज्ञित।
१९१३ ई०
बंगाल में दामोदर नदी में आई भीषण बाढ़ के समय ५ अन्य विद्यार्थियों के साथ रामकृष्ण मिशन की ओर से पीड़ितों की सहायता के लिए कोलकाता से प्रस्थान। गंगा ओर सागर के संगम पर मकर संक्रान्ति के मेले के अवसर पर हैजा फैलने पर पथक बनाकर पीड़ितों की सेवा-सुश्रूषा एवं ओषधोपचार।
१२ सितम्बर, १९१४ ई०
दीक्षान्त समारोह - अन्तिम वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण कर एल.एम. एण्ड एस. की उपाधि लेकर डॉक्टर बने।
१९१५ ई०
नेशनल मेडिकल कॉलेज की पूर्ण मान्यता के लिए सफल आन्दोलन।
१९१६ ई०
चिकित्सीय उपाधि लेकर नागपुर वापस, मध्य भारत प्रान्त में क्रान्तिकारी कार्यो का सफल संयोजन। सबसे बड़े भाई श्री महादेव शास्त्री की प्लेग से मृत्यु।
१९१७ ई०
चाचा जी को प्रेषित पत्र द्वारा व्यवसाय न करते हुए अविवाहित रहकर राष्ट्र कार्य करने का निर्णय, तब १९१७ में मध्य प्रान्त एवं बरार क्षेत्र में केवल ७५ चिकित्सक ही निजी व्यवसाय कर रहे थे।
१९२० ई०
नागपुर में होने वाले काँग्रेस के अखिल भारतीय अधिवेशन हेतु स्वयंसेवक दल प्रमुख एवं आवास व्यवस्था प्रमुख घोषित। तिलक जी की मृत्यु के पश्चात् नागपुर अधिवेशन के अध्यक्ष पद हेतु श्री अरविन्द जी से पुडुचेरी आश्रम में भेंट। अधिवेशन में १४५८३ प्रतिनिधि, ३००० स्वागत समिति के सदस्य एवं ७-८ हजार दर्शक।
२३ फरवरी १९२१ ई०
जिलाधिकारी सिरिल जैम्स इरविन द्वारा धारा १४४ के अन्तर्गत १ माह की सजा "किसी भी सार्वजनिक सभा में किसी भी प्रकार से सहभागिता करने पर प्रतिबन्ध।"
मई १९२१ ई०
काटोल तथा भरतवाड़ा के पूर्व के भाषणों के कारण राजद्रोह के आरोप में मुकदमा लिपिबद्ध (दर्ज)। १९ अगस्त १९२१ ई० को मुकदमे का निर्णय - स्लेमी के न्यायालय द्वारा एक वर्ष तक राजद्रोही भाषण न करने हेतु अभिवचन देते हुए एक-एक हजार की २ जमानतें तथा १०००/- रुपये का मुचलका लिखकर देना, न मानने पर १ वर्ष का सश्रम कारावास।
१२ जुलाई १९२२ ई०
कारागार से मुक्ति । प्रान्तीय कांग्रेस के लिए चुनाव तथा प्रान्तीय कांग्रेस के सहमंत्री नियुक्त।
२७ सितम्बर १९२५ ई०
वि.सं. १९८२ विजयादशमी के दिन नागपुर में संघ स्थापना।
१७ अप्रैल १९२६ ई०
संघ के नामकरण हेतु अपने घर पर बैठक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम घोषित। मोहिते का बाडा नामक स्थान, संघस्थान निश्चित।
१९ सितम्बर, १९२६ ई०
औपचारिक रूप से संघ प्रमुख घोषित।
१९२८ ई०
कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में श्री सुभाषचन्द्र बोस से देश की परिस्थितियों के बारे में विचार-विमर्श।
१० नवम्बर १९२९ ई०
सरसंघचालक घोषित एवं प्रथम सरसंघचालक प्रणाम ।
१२ जुलाई १९३० ई०
श्री गुरु दक्षिणा महोत्सव पर सत्याग्रह में भाग लेने के निर्णय के कारण अपनी अनुपस्थिति में संघ कार्य संचालन की योजना। (नागपुर कार्य का भार श्री बाबा साहब आप्टे तथा श्री बापूराव भेदी को दिया एवं डॉ. परांजपे को सरसंघचालक घोषित किया)
२१ जुलाई १९३० ई०
यवत माल में जंगल सत्याग्रह कर असहयोग आन्दोलन में सहभाग, ६ एवं ३ माह (कुल ९ माह) का सश्रम कारावास।
१४ फरवरी १९३१ ई०
कारावास से मुक्ति, १६ फरवरी नागपुर पहुँचना, जुलाई शुद्धि समारोह में सहभाग, अप्रैल १९३२ श्री गुरु जी से नागपुर में प्रथम भेंट।
१९३३ ई०
नाग नदी के पार रेशिमबाग में एक किसान से ७००/-रु. में लगभग सवा दो एकड़ भूमि क्रय।
२६ दिस. १९३४ ई०
श्री अप्पाजी जोशी, श्री अण्णा साहब भोपटकर के साथ वर्धा में महात्मा गाँधी से भेंट।
२ मई १९३५ ई०
सांगली में हुए कार्यक्रम के अवसर पर पूर्ण गणवेश में प्रथम छाया चित्र।
अक्टूबर १९३५ ई०
शारीरिक शिक्षण एवं आचार पद्धति की पुनर्रचना हेतु सिन्दी में श्री अप्पाजी जोशी, श्री दादा साहब देव, श्री कृष्ण राव मोहरीर के साथ श्री नाना साहब टालाटुले के निवास पर बैठक।
मई १९३६ ई०
आद्य गुरु शंकराचार्य जयन्ती पर शंकराचार्य पू० स्वामी विद्याशंकर भारती द्वारा राष्ट सेनापति की उपाधि से।
२४ मार्च १९३६ ई०
“संघ स्थापना विधि" पहली बार एक महत्वपूर्ण सूचना पत्रक का लेखन।
१९३८ ई०
नागपुर के अधिकारी शिक्षण वर्ग (संघ शिक्षा वर्ग) का दायित्व श्री गुरुजी को दिया।
फरवरी १९३९ ई०
सिन्दी मे श्री बबनराव पण्डित जी के निवास पर प्रमुख कार्यकर्ताओं (श्री गुरु जी, श्री अप्पा जी जोशी, श्री बाला साहब देवरस, श्री तात्या राव तैलंग, श्री बिट्लल राव पतकी, श्री बाबा साहब सालोडकर, श्री नाना साहब टालाटुले, श्री कृष्णराव मोहरीर) के साथ संघ के विधान, आज्ञाये, प्रार्थना, कार्यपद्धति तथा प्रतिज्ञा आदि विषयों पर विचार करने हेतु १० दिवसीय बैठक प्रारम्भ। प्रार्थना के लिए कुछ आधारभूत विचारों के आधार पर श्री नाना साहब टालाटुले द्वारा गद्य में प्रार्थना की रचना। उपरान्त श्री नरहरि नारायण भिड़े द्वारा वर्तमान पद्यरूप प्रार्थना की रचना।
१३ अग० १९३९ ई०
श्री गुरुजी की सरकार्यवाह दायित्व के लिए घोषणा।
३१ जनवरी १९४० ई०
राजगिरि में चिकित्सा हेतु प्रस्थान।
२० मई १९४० ई०
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का कोलकाता से भेंट करने हेतु आगमन।
९ जून १९४० ई०
अधिकारी शिक्षण वर्ग (संघ शिक्षा वर्ग) के निजी समारोह (दीक्षान्त) में अन्तिम उद्वोधन।
१४ जून १९४० ई०
नागपुर के मेयो चिकित्सालय में प्रवेश।
१९ जून १९४० ई०
मुम्बई के एक स्वयंसेवक की शल्यक्रिया (ऑपरेशन) की सफलता पर बधाई हेतु पत्र लेखन।
२० जून १९४० ई०
श्री सुभाष चन्द्र बोस का भेंट हेतु आगमन। दुर्भाग्य से वार्ता न हो पाना। २० जून १९४० ई० को श्री गुरु जी को उत्तराधिकारी घोषित किया।
२१ जून १९४० ई०
शुक्रवार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष द्वितीया शक सम्वत् १८६२ प्रातः९ बजकर २७ मिनट पर स्वर्गवास। अन्तिम संस्कार हेतु सायं ५ बजे धरमपेठ स्थित श्री बाबा साहब घटाटे के बंगले से शव यात्रा प्रारम्भ (लगभग सवा मील लम्बी)। रात्रि ९ बजे ज्येष्ठ बन्धु श्री तात्या जी हेडगेवार द्वारा अन्तिम संस्कार।